इस देश से मैं गद्दार नहीं हूँ
लाल किया है मैंने भी लहू से तारिख को
तमाशा देखता रहा वोह राहगीर नहीं हूँ
जो पीलेते है खून अपनों ही का बे खोव्फ़
यारों मैं वोह शय्तन नहीं हूँ
कतरा-कतरा ज़ख्म- ज़ख्म सब मेहसूस करता हूँ
दर्द और एहसास से अनजान नहीं हूँ
अदाकार, शायर, खिलाडी, नीता, उस्ताद हूँ
जो दे रहे हो पहचान वो आतंकवाद नहीं हूँ
इस मिटटी का मैं हूँ यह मिटटी है मेरी
दफ़न हो जाऊंगा इसी में मैं मेहमान नहीं हूँ
मुस्लमान हूँ मैं पाकिस्तान नहीं हूँ...

मुस्लमान हूँ मैं पाकिस्तान नहीं हूँ...
ReplyDeletewah khub kaha hai
nice