Friday, 25 September 2009
Second Report25th July To 30th August 2009प्यारे दोस्तों, अब मैं अपनी इन्तेर्न्शिप यात्रा समाप्त करने के बाद अपने शहर मुंबई मैं युवाओं के साथ समय बिता रहा हूँ. बोहत सी अच्छी सिख लेकर अपनी यात्रा को मज़बूत बना रहा हूँ. पिछले दिनों की कुछ बातें आप के साथ बाँटना चाहता हूँ. मेरी पिछली इन्तेर्न्शिप मध्य प्रदेश में हुई समर्थन और समावेश, समर्थन 26th to 30th aug. 09 मध्य प्रदेश के एक जिलाह सीहोर में सर्थन के काम को समझने की कोशिश की, पहले ही दिन मुझे सीहोर के एक गाँव देवली में " समाजिक निगरानी" के कार्यकर्म में पोहंचा वहो यह देख कर मैं हैरत में पड़ गया के एसा भी होसकता है के सरपंच अपने कम का पूरा हिसाब किताब गाँव के लोगो के सामने रखे. लोगों का सवाल करना ओउर सिर्फ सवाल ही नहीं जवाब भी मांगना आने वाले समय के बदलाव कई निशानी है, मेरी सिख अगर समाज में बदलाव लाना है तो समाज के ठेकेदारों से समाज को बदलने की शुरवात करो.लोगों में आत्मा विश्वास पैदा करो जो हमेशा बना रहे न के कोई बता रहा है तब ही लोग काम करे.जब हम दो पक्षों के बेच काम कर रहे हो तब एक पक्ष के ही तरफ से न बोलें एसे में सम्बन्ध ख़राब होने की संभावना होती है.कार्यक्रम का आयोजन एसी जगह हो जहाँ सरे लोग आराम से बैठ सके और सहभागी भी हो सकें.\गंज और इन्द्र बस्ती में विसित गंज और इन्द्र नगर बस्ती में विसित कर वहां के युवाओं से बात चीत की और वहां की परस्थितियों को समझने की कोशिश की. योवओं से बात करने से ये पता चला के लोग सरपंच के कामो को लेकर बोहत ही चौकन्ने है सरपंच के हर हरकत पैर लोगों की नज़र होती है क्या कम कहा और कियों किया जा रहा है. समर्थन के साथी वोगेन्द्र के साथ हमने सरपंच के एक साल के काम और बदलाव को लेकर बस्ती में युवाओं के साथ चर्चा की.मेरी सिख युवाओं के उत्साह के अनुसार काम को आगे बढाओ.Urban Governance चंचल जी के साथ भोपाल के सारे सरकारी दफ्तरों के विसित की जिस में ये दफ्तर शामिल थे.१) तहसीलदार दफ्तर २) नगर पालिका के अलग अलग विभाग३) वर्ड ऑफिस ४) १२ दफ्तर जहाँ तहसीलदार भी होतें है५) पेंशन कार्यालय बस्ती की उन माहि लों के साथ ये विसित का आयोजन किया गया था जो बस्ती में नेतृत्व करती है और अपने समाज के विकास के लिए काम करना छाती है. मेरी सिख अगर टेरना सीखना है तो समंदर में उतरना पड़ेगा, बहार बैठकर हम टेरना नहीं सिखा सकतेलोगो के साथ दफ्तर में जाने से नए लोगों को आत्मा विश्वास मिलता हैअगर दिन भर कम करना है तो नियोजन करें नहीं तो समय ख़राब होता है और काम अधुरा रह सकता हैअगर जिम्मेदारियां आपस में बाँट ली जायेन तो गडबडी होने की शंका बोहत कम होती है समावेश (भोपाल) 1st Sep. 4th Sep. 09भोपाल मैं मेरी पहली मुलाकात स्याग भाई से समावेश के दफ्तर में हुई. स्याग भाई ने समावेश के कम को पुरे खुलासे के साथ बताया आगाज़ अकादमी, चकमक क्लब, शिक्षा पहेल, सखी पहेल, सारी बातें. दुसरे दिन मध्य प्रदेश के गाँव गाँव से आये समावेश की योवओं की टीम के साथ जोड़ दिया जो खाते गाँव , खिरकिया गाँव से आये हुए थे. शिक्षा पहेल और सखे पहेल ये दो प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के ७०-८० गाँव में चल रहे है.शिक्षा पहेल:-ये कार्यकरम सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से चौथी कक्षा के विद्यार्थियों के साथ चलाया जाता है. जो समावेश के बाल मित्र सर्व शिक्षा अभियान के साथ साथ ही चलते है. बाल मित्रों का पढ़ने का तरीका खेलों, चित्र कथाओं, विज्ञानिक प्रयोगों की किताबों, खिलोनों के दुवारा होता है जिससे बचों में पढने की इच्छा बढती है. सखी पहेल:- सखी पहेल महिलाओं के लिए है, khas वो mahilayen जो sarpanch है और sarpanch के लिए तयार होना चाहती है और इन महिलाओं सरपंच के काम नेतृतव विकास के लिए सक्षम बनाया जाता है इससे आगाज़ अकादमी कहते है. पर सखी पहेल अब कम नहीं करता महिलाएं खुद संघटन बना कर कम करती है.बाकि की बातें अगले मेल में होगी.....इस्माईल शरीफ
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